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143525. وازره1 143526. وازعه1 143527. وازف1 143528. وازن1 143529. وَازِن1 143530. وازْوَاز1143531. وَازَى1 143532. وَاسَا1 143533. واستطرد له في الحرب1 143534. واسِطٌ1 143535. واسِطُ1 143536. وَاسِطَة1 143537. واسطة الفيض1 143538. وَاسِطييّ1 143539. وَاسِف1 143540. واسقه1 143541. واسِلين1 143542. واسِمٌ1 143543. واسْمه1 143544. واسى في1 143545. واسَيْتُهُ1 143546. وَاسِيد1 143547. وَاسِيليّ1 143548. واشَجِرْدُ1 143549. واشك1 143550. وَاشِل1 143551. واشلة1 143552. وَاشِيلِي1 143553. وَاصَال1 143554. واصب1 143555. وَاصَّة1 143556. وَاصِف1 143557. واصفته1 143558. وَاصِل1 143559. وَاصِل النعمة1 143560. واصله1 143561. وَاصِليّ1 143562. واصلية1 143563. وَاصِية1 143564. واضأه1 143565. وَاضِحا1 143566. وَاضِحَة1 143567. واضخه1 143568. وَاضع1 143569. واضع1 143570. وَاضِف1 143571. وَاضُور1 143572. وَاضِي1 143573. واط2 143574. واطأ1 143575. وَاطَأَ في1 143576. واطِفَاء1 143577. واطمتر1 143578. واطنه1 143579. وَاطُون1 143580. واظب1 143581. واظفه1 143582. وَاعّ1 143583. وَاعِد2 143584. واعده1 143585. وَاعِر1 143586. وَاعّرا1 143587. وَاعِز1 143588. وَاعَزِين1 143589. واعست1 143590. وَاعِض1 143591. واعقة1 143592. وَاعْلَم أَن للفكر ثَلَاثَة معَان...1 143593. واغده1 143594. وَاغِي1 143595. وَافّ1 143596. وَافَا1 143597. وَافِتِيّ1 143598. وافده1 143599. وَافِدي1 143600. وافزه1 143601. وَافق1 143602. وَافَقَ1 143603. وافق مع1 143604. وافقه1 143605. وَافِنِيّ1 143606. وافى1 143607. وَافِي1 143608. وَافية1 143609. وَاقِد1 143610. واقرة1 143611. واقس1 143612. واقِصَةُ1 143613. واقع1 143614. واقعه1 143615. واقِف1 143616. واقفه1 143617. واقِمٌ1 143618. واقواق1 143619. وَاقِيَةُ1 143620. واكأ1 143621. واكب1 143622. وَاكِب1 143623. واكَرِيِّم1 143624. وَاكريم1 Prev. 100
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وازْوَاز:
بزايين معجمتين، قال أحمد بن محمد الهمذاني:
بنهاوند موضع يقال له وازواز البلّاعة، هو حجر كبير فيه ثقب يكون فتحه أكثر من شبر يفور منه الماء كل يوم فيخرج وله صوت عظيم وخرير هائل فيسقي أراضي كثيرة ثم يتراجع حتى يدخل ذلك الثقب وينقطع، وذكر ابن الكلبي أن هذا الحجر مطلسم بسبب الماء لا يخرج إلا وقت الحاجة إليه ثم يغور إذا استغني عنه، وقيل إن الفلّاح يجيء إليه وقت حاجته إلى الماء فيقف إزاء الثقب ثم ينقره بالمرّ دفعة أو دفعتين فيفور الماء بدويّ شديد فإذا سقى ما يريد وبلغ منه حاجته تراجع إلى الثقب وغار فيه إلى وقت الحاجة إليه، قال وهذا مشهور بالناحية ينظر إليه كل من أحب ذلك وأراده، قلت: وهذا مما لنا فيه مرتاب.