141191. هبك3 141192. هُبَكاتُ1 141193. هَبَكَان1 141194. هُبل4 141195. هَبَلَ1 141196. هُبَلُ1141197. هبل13 141198. هُبل 1 141199. هَبَلَ 1 141200. هَبِلَتْهُ1 141201. هبلس3 141202. هِبْلِسٌ1 141203. هبلع7 141204. هَبْلَعَ1 141205. هبلق1 141206. هَبَلِيّ1 141207. هبم1 141208. هبن4 141209. هبنغ2 141210. هبنق4 141211. هبنقة1 141212. هبنقع3 141213. هَبَنْقَعَ1 141214. هبنك4 141215. هَبْهَبَ1 141216. هبهب5 141217. هبو11 141218. هَبَوَ 1 141219. هَبُوب1 141220. هَبُوبَان1 141221. هَبْوَة1 141222. هبوج. هبوج1 141223. هَبُّود1 141224. هَبُوز1 141225. هبوط1 141226. هبوط الْكَوَاكِب1 141227. هبوقسطيداس1 141228. هَبُولي1 141229. هَبُون1 141230. هبى1 141231. هبي1 141232. هَبِيَّان1 141233. هبيب1 141234. هُبَيْب1 141235. هَبيب1 141236. هَبَيَّة1 141237. هبيخ1 141238. هُبَيْش1 141239. هبيش1 141240. هُبَيْص1 141241. هَبِيص1 141242. هَبيكان1 141243. هبيل1 141244. هُبَّيْن1 141245. هَبين1 141246. هت7 141247. هَتَّ 1 141248. هتء2 141249. هتأ6 141250. هَتَأَهُ1 141251. هتأه1 141252. هتا4 141253. هَتَّاء1 141254. هِتَاء1 141255. هَتَّاشِي1 141256. هِتَاف1 141257. هتب1 141258. هَتَتَ1 141259. هتت6 141260. هتث1 141261. هَتَرَ1 141262. هتر18 141263. هَتَرَ 1 141264. هِتْران1 141265. هترك1 141266. هترم1 141267. هترن1 141268. هَتْرُونَة1 141269. هُتِشَ1 141270. هتش5 141271. هَتَشَان1 141272. هَتْشِيّ1 141273. هَتَعَ1 141274. هتع3 141275. هَتَعَ 1 141276. هتف17 141277. هَتَفَ1 141278. هَتَفَ 1 141279. هَتَفَتِ1 141280. هتك15 141281. هَتَكَ2 141282. هَتَكَ 1 141283. هتكر2 141284. هَتَل1 141285. هتل8 141286. هَتَلَ 1 141287. هَتَلَتِ1 141288. هتلم2 141289. هتم14 141290. هَتَمَ2 Prev. 100
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هُبَلُ:
بالضم ثم الفتح، بوزن زفر، أظنه من الهابل وهو الكثير اللحم والشحم، ومنه حديث عائشة:
والنساء يومئذ لم يهبّلهن اللحم، أي لم يسمنّ، أو من الهبل وهو الثكل يراد به أنّ من لم يطعه أهبله أي أثكله، أو من الهبل والهبالة وهو الغنيمة أي يغتنم عبادته أو يغتنم من عبده، والله أعلم، وهبل:
صنم لبني كنانة بكر ومالك وملكان وكانت قريش تعبده، وكانت كنانة تعبد ما تعبده قريش وهو اللّات والعزّى، وكانت العرب تعظم هذا المجمع عليه فتجتمع عليه كل عام مرة، وقيل: إن هبل كان من أصنام الكعبة، وقال أبو المنذر هشام بن محمد: وكانت لقريش أصنام في جوف الكعبة وحولها وكان أعظمها عندهم هبل وكان فيما بلغني أنه من عقيق أحمر على صورة الإنسان مكسور اليد اليمنى أدركته قريش كذلك فجعلوا له يدا من ذهب، وكان أول من نصبه خزيمة بن مدركة بن إلياس ابن مضر، وكان يقال له هبل خزيمة، وكان في جوف الكعبة قدّامه سبعة أقدح مكتوب في أولها صريح والآخر ملصق، فإذا شكّوا في مولود أهدوا له هدية ثم ضربوا بالقداح فإن خرج صريح ألحقوه وإن خرج ملصق دفعوه، وقدح على الميت وقدح على النكاح، وثلاثة لم تفسر لي على ما كانت، فإذا اختصموا في أمر أرادوا سفرا أو عملا استقسموا بالقداح عنده فما خرج عملوا به وانتهوا إليه، وعنده ضرب عبد المطلب بالقداح على ابنه عبد الله والد النبي، صلى الله عليه وسلّم، وهو الذي يقول له أبو سفيان بن حرب حين ظفر يوم أحد: أعل هبل أي أعل دينك، فقال رسول الله، صلّى الله عليه وسلّم: الله أعلى وأجلّ، ولما ظفر النبي، صلّى الله عليه وسلّم، يوم فتح مكة دخل المسجد والأصنام منصوبة حول الكعبة فجعل يطعن بسية قوسه في عيونها ووجوهها ويقول:
جاء الحق وزهق الباطل إن الباطل كان زهوقا، ثم أمر بها فألقيت على وجوهها ثم أخرجت من المسجد فأحرقت، فقال في ذلك راشد بن عبد الله السّلمي:
قالت: هلمّ إلى الحديث! فقلت: لا،
يأبى الإله عليك والإسلام ... لما رأيت محمدا وقبيله
بالفتح حين تكسّر الأصنام ... ورأيت نور الله أصبح ساطعا
والشرك تغشى وجهه الأقتام