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138406. نسخَ1 138407. نَسَخَ1 138408. نَسَخَ 1 138409. نُسْخَة مِن1 138410. نَسَخَه1 138411. نَسْرٌ1138412. نَسْر1 138413. نسر17 138414. نِسْر1 138415. نَسَرَ1 138416. نَسَرَ 1 138417. نَسْرة1 138418. نِسْريّ1 138419. نِسْرِيَّة1 138420. نِسْرِين1 138421. نسرين1 138422. نَسْرِينيّ1 138423. نسس12 138424. نَسَسَ1 138425. نسط6 138426. نسطاس1 138427. نِسْطَاسٌ2 138428. نَسْطة1 138429. نسطر6 138430. نسطس4 138431. نسع11 138432. نِسْعٌ1 138433. نَسَعَ1 138434. نَسَعَ 1 138435. نسعت1 138436. نسغ9 138437. نَسَغَ 1 138438. نسغت1 138439. نَسَغَهُ1 138440. نَسَفَ1 138441. نَسَفُ1 138442. نسف17 138443. نَسَفَ 1 138444. نَسَفَانُ1 138445. نُسْفي1 138446. نِسْفِي1 138447. نسق13 138448. نَسَقَ2 138449. نَسَقَ 1 138450. نسقه1 138451. نسك16 138452. نَسَكَ1 138453. نَسَكَ 1 138454. نَسْلٌ1 138455. نسل17 138456. نَسَلَ1 138457. نَسَلَ 1 138458. نَسْلان1 138459. نَسَلان1 138460. نَسْليّ1 138461. نسم18 138462. نَسَمَ1 138463. نَسَمَ 1 138464. نِسْمَة1 138465. نَسْمَة1 138466. نِسْمت1 138467. نسمت1 138468. نِسْنَاس1 138469. نِسْنَانُ1 138470. نسنس7 138471. نَسْنَسَ1 138472. نسنن1 138473. نسو5 138474. نسو ونسي1 138475. نَسْوان1 138476. نِسْوان1 138477. نَسْوَة1 138478. نِسْوة1 138479. نُسُور1 138480. نَسَويّ1 138481. نسى3 138482. نَسَى1 138483. نسي8 138484. نَسِيَ 1 138485. نَسَيَان1 138486. نسيان1 138487. نَسِيب2 138488. نُسَيْبَا1 138489. نَسِيْبَا1 138490. نَسِيبَة1 138491. نَسِيْج1 138492. نَسِيحٌ ونِسَاح1 138493. نَسِيحَة1 138494. نُسَيْعَة1 138495. نسيعة1 138496. نَسِيف1 138497. نَسِيلَا1 138498. نَسِيم1 138499. نسيم1 138500. نُسَيْم1 138501. نُسَيْمَة1 138502. نَسِيَمة1 138503. نَسِيَهُ1 138504. نش4 138505. نَشَّ 1 Prev. 100
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نَسْرٌ

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نَسْرٌ:
بالفتح ثم السكون، وراء، بلفظ النسر من جوارح الطير: موضع في شعر الحطيئة من نواحي المدينة، ذكرها الزبير في كتاب العقيق وأنشد لأبي وجرة السعدي:
بأجماد العقيق إلى مراخ ... فعنف سويقة فنعاف نسر
ونسر: أحد الأصنام الخمسة التي كان يعبدها قوم نوح، عليه السّلام، وصارت إلى عمرو بن لحيّ، كما ذكرنا في ودّ، ودعا القوم إلى عبادتها فكان فيمن أجابه حمير فأعطاهم نسرا ودفعه إلى رجل من ذي رعين يقال له معدي كرب فكان بموضع من أرض سبإ يقال له بلخع فعبدته حمير ومن والاها فلم تزل تعبده حتى هوّدهم ذو نواس، وقال الحافظ أبو القاسم في كتابه: عبد الله بن أحمد بن عبد الله بن أحمد أبو محمد النسري الداورداني قدم دمشق وسمع بها أبا محمد بن أبي نصير، روى عنه علي بن الخضر السلمي. والنسر: ضيعة من ضياع نيسابور، هكذا ذكره في آخر كلامه، وقال أبو المنذر: اتخذ حمير صنما اسمه نسر فعبدوه بأرض يقال لها بلخع، ولم أسمع حمير سمت به أحدا، يعني قالوا عبد نسر، ولم أسمع له ذكرا في أشعارها ولا أشعار أحد من العرب، وأظن ذلك لانتقال حمير، وكان أيام تبّع، من عبادة الأصنام إلى اليهودية، قلت وقد ذكره الأخطل فقال:
أما ودماء مائرات تخالها ... على قنّة العزّى وبالنسر عندما
وما سبّح الرحمن في كل بيعة ... أبيل الأبيلين المسيح بن مريما
لقد ذاق منا عامر يوم لعلع ... حساما إذا ما هزّ بالكفّ صمّما