125895. لاغزه1 125896. لاغفه1 125897. لاغَهُ1 125898. لاغه1 125899. لَاغِي1 125900. لاغي2125901. لاف3 125902. لَاف1 125903. لَافّ1 125904. لَافَة1 125905. لَافَّة1 125906. لافت1 125907. لَافِت1 125908. لافِت1 125909. لَافِتِيّ1 125910. لافَرّ1 125911. لافونة1 125912. لَافِي1 125913. لَافِيح1 125914. لافير1 125915. لافيه1 125916. لاقَ1 125917. لَاق1 125918. لاقاه1 125919. لاقت1 125920. لَاقْرَن1 125921. لاقسه1 125922. لاقطه1 125923. لاقُوا1 125924. لاك1 125925. لَاكْحَل1 125926. لاكد1 125927. لَاكْدَى1 125928. لاكزه1 125929. لَاكِم1 125930. لاكمالان1 125931. لاكمه1 125932. لاكن1 125933. لاكنن1 125934. لاكننما1 125935. لاكه1 125936. لال1 125937. لالا1 125938. لالاَّ1 125939. لالال1 125940. لالَّة1 125941. لَالْحَظِي1 125942. لالك1 125943. لاله1 125944. لالُوشّة1 125945. لالَّى1 125946. لالي1 125947. لام2 125948. لَام الْأَمر1 125949. لام الأمر1 125950. لامَ لِـ1 125951. لاما1 125952. لَامَّاء1 125953. لَامَّاس1 125954. لامبرت1 125955. لَامِج1 125956. لامِجان1 125957. لَامِحَة1 125958. لامحه1 125959. لَامِز1 125960. لامزه1 125961. لَامِس1 125962. لامِسُ1 125963. لامستم1 125964. لامسه1 125965. لامِشُ1 125966. لَامْشَنِيّ1 125967. لامَغَان1 125968. لاَمِك1 125969. لاممي1 125970. لامه1 125971. لَامْوَت1 125972. لامون1 125973. لَامِيّ1 125974. لَامِي1 125975. لامي1 125976. لاميَّة1 125977. لَامْيَة1 125978. لَامِيرة1 125979. لَامِيعة1 125980. لَامِين1 125981. لاميون1 125982. لان1 125983. لَان2 125984. لانَ1 125985. لانا1 125986. لانْجَش1 125987. لَانْسَكِيّ1 125988. لاه2 125989. لاهَ1 125990. لَاهَ 1 125991. لَاهِب1 125992. لَاهِج1 125993. لاهِجُ1 125994. لاهس1 Prev. 100
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لاغي
عن الفارسية بمعنى المزاخ الظريف، والهزال كثير الهزل.
لاغي
الجذر: ل غ

مثال: هذا القرار لاغي
الرأي: مرفوضة
السبب: لثبوت الياء في الاسم المنقوص في حالة الرفع.

الصواب والرتبة: -هذا القرار لاغٍ [فصيحة]-هذا القرار لاغي [صحيحة]
التعليق: الاسم المنقوص إذا لم يكن معرفًا بأل أو الإضافة تحذف ياؤه في حالتي الرفع والجر وتثبت في حالة النصب، ويمكن تصحيح الاستعمال المرفوض اعتمادًا على ورود نظائر له في القراءات القرآنية، كقراءة: {وَلِكُلِّ قَوْمٍ هَادي} الرعد/7، وقراءة: {وَمَا لَهُمْ مِنْ دُونِهِ مِنْ وَالي} الرعد/11، وقراءة: {وَمَا لَهُمْ مِنَ اللَّهِ مِنْ وَاقي} الرعد/34، وغير ذلك، وقد اتخذ مجمع اللغة المصري قرارًا- في دورته الرابعة والخمسين- بصحة إثبات ياء المنقوص النكرة في حالتي الرفع والجر عند الحاجة.