122123. كَارِيم1 122124. كارين2 122125. كاز2 122126. كازَرُ1 122127. كازَر1 122128. كازَرُونُ1122129. كَازِم1 122130. كازَه1 122131. كازوميّ1 122132. كازي1 122133. كَازِيَا1 122134. كازيا1 122135. كازياركاه1 122136. كاس2 122137. كاسَ1 122138. كاس 1 122139. كاسَانُ1 122140. كَاسِب1 122141. كاسبار1 122142. كَاسِع1 122143. كاسْكان1 122144. كاسِميّ1 122145. كاسَن1 122146. كاسُوحَة1 122147. كَاسِيب1 122148. كاسيت1 122149. كاسيية1 122150. كاش1 122151. كاشَانُ1 122152. كاشان1 122153. كَاشَانِي1 122154. كَاشَّة1 122155. كَاشْت1 122156. كَاشِح1 122157. كاشحه1 122158. كاشره1 122159. كاشْغَر1 122160. كَاشِف1 122161. كَاشِفَا1 122162. كَاشفف1 122163. كاشفه1 122164. كاشْكَن1 122165. كَاشُوري1 122166. كَاشُوك1 122167. كاشي1 122168. كاصَ1 122169. كاص1 122170. كَاصِر1 122171. كاصْطَخَمَ.1 122172. كَاصِم1 122173. كَاصِي1 122174. كاطري1 122175. كَاطِع1 122176. كَاطُوف1 122177. كاطوليكي1 122178. كَاظَّا1 122179. كَاظَّانِي1 122180. كَاظِم1 122181. كَاظِمة1 122182. كاظِمَةُ1 122183. كَاظِمن1 122184. كَاظِمِيّ1 122185. كاظه1 122186. كَاظِّي1 122187. كَاظِيم1 122188. كَاظِيمة1 122189. كاع1 122190. كاعمها1 122191. كاغذ1 122192. كاف1 122193. كَاف3 122194. كافأه1 122195. كَافَأَهُ1 122196. كَافَّة2 122197. كَافَّةُ الأَعْضَاءِ...1 122198. كافحه1 122199. كافِرٌ1 122200. كافربچة1 122201. كافل1 122202. كافله1 122203. كَافُوج1 122204. كافور2 122205. كَافِي1 122206. كافيار1 122207. كَافية1 122208. كَاكَا1 122209. كاكاو1 122210. كاكُدَم1 122211. كاكس1 122212. كاكنج1 122213. كاكه1 122214. كاكى1 122215. كاكي1 122216. كالَ1 122217. كال2 122218. كالأه1 122219. كالبه1 122220. كالجَعْظِ1 122221. كالحه1 122222. كالخَدَنَّقِ1 Prev. 100
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كازَرُونُ:
بتقديم الزاي، وآخره نون: مدينة بفارس بين البحر وشيراز، قال البشّاري: كازرون بلدة عامرة كبيرة وهي دمياط الأعاجم وذلك أن ثياب الكتّان التي على عمل القصب وشبه الشّطويّ وإن كانت حطبا تعمل بها وتباع بها إلّا ما يعمل بتوّز، ثم هي كلها قصور وبساتين ونخيل ممتدّة عن يمين وشمال وبها سماسرة كبار وسوق كبيرة جادّة، ومعظم الدور والجامع على تلّ يصعد إليه والأسواق وقصور التجار تحت، وقد بنى عضد الدولة بن بويه دارا جمع فيها السماسرة، دخلها للسلطان كلّ يوم عشرة آلاف درهم، للسماسرة في البلد قصور حصينة حسنة وليس بها نهر مادّ إنما هي قنيّ وآبار، وبكازرون تمر يقال له الجيلان يتفرّد به ذلك الموضع ولا يكون بالعراق ولا بكرمان مثله ويحمل منه إلى العراق في الهدايا على كثرة التمور بالعراق، وبينها وبين شيراز ثلاثة أيام ثمانية عشر فرسخا، قال الإصطخري: وأما كازرون والنوبندجان فهما أكبر مدن كورة سابور، وكازرون والنوبندجان متقاربتان في الكبر إلّا أنّ بناء كازرون أوثق وأكثر قصورا وأصح تربة وليس بجميع فارس أصحّ هواء وتربة من كازرون، ومياههم من الآبار، وهي مدينة حصينة واسعة كثيرة الثمار وأخصب مدن كورة سابور، وبينها وبين فسا ثمانية فراسخ،
ولكازرون ذكر في أخبار الخوارج والمهلّب، قال النعمان بن عقبة العتكي من أصحاب المهلّب:
ليت الحواصن في الخدور شهدننا ... فيرين من وغل الكتيبة أوّلا
وقروا وكنّا في الوقار كمثلهم، ... إذ ليس تسمع غير قدّم أو هلا
رعدوا فأبرقنا لهم بسيوفنا ... ضربا ترى منه السواعد تختلى
تركوا الجماجم، والرماح تجيلها ... في كازرون كما تجيل الحنظلا
وينسب إلى كازرون جماعة من أهل العلم، منهم من المتأخرين: أحمد بن منصور بن أحمد بن عبد الله بن إبراهيم بن جعفر أبو العباس الكازروني، قدم بغداد في سنة 539 وأقام بها للتفقه على مذهب الشافعي وسمع بها من جماعة، منهم: أبو محمد عبد الله بن عليّ المغربي سبط أبي منصور الخيّاط وشيخ الشيوخ أبو البركات إسماعيل بن أحمد النيسابوري وأبو الفضل محمد بن عمر الأرموي وغيرهم وعاد إلى بلده وتولى العصامة ثم قدم بغداد في سنة 586 رسولا وحدث بها وجمع لنفسه نسخة في سبعة أجزاء، وكان خبيرا، له فهم ومعرفة، ومولده في ذي الحجة سنة 516، وخرج ومات بشيراز في جمادى الأولى سنة 587، وأبو الحسين بن أبي علي الكازروني الصوفي، حدث عن أحمد بن العباس بن حوّى وسمع أبا الحسن علي بن أحمد بن محمد بن عتيق الشيرازي وعلي بن محمد بن إبراهيم الحربي السّتيتي، ومات سنة 454، ذكره أبو القاسم.