68954. جَاهِدة1 68955. جاهره1 68956. جَاهِزَة1 68957. جَاهِزة1 68958. جاهضه1 68959. جاهلٌ في168960. جَاهِلَة1 68961. جاهله1 68962. جَاهِلِين1 68963. جَاهِيّ1 68964. جاهي1 68965. جَاهِين1 68966. جَاوَا1 68967. جاواي1 68968. جاوب1 68969. جاوبه1 68970. جَاوَة1 68971. جاودار1 68972. جاودان خرد1 68973. جاودان كبير1 68974. جاودان نامه1 68975. جاوده1 68976. جاورس2 68977. جَاوَرْسانُ1 68978. جَاوَرْسَة1 68979. جَاورَشْ1 68980. جاوره1 68981. جاوري1 68982. جَاوز1 68983. جاوش1 68984. جاوشير1 68985. جاوله1 68986. جاون1 68987. جاووش1 68988. جاوى1 68989. جاوي1 68990. جَاوِي1 68991. جَاوِيَة1 68992. جاويت1 68993. جَاوِيد1 68994. جَاوِيد الحَقّ1 68995. جَاوِيش2 68996. جايأه1 68997. جَايبِيّ1 68998. جَايِح1 68999. جَايِحيّ1 69000. جَايِد1 69001. جَايِر1 69002. جَايِز1 69003. جَايِس1 69004. جَايِش1 69005. جَايِشِيّ1 69006. جايضهم1 69007. جَايِلة1 69008. جايمي1 69009. جَايِمِي1 69010. جب7 69011. جُبّ1 69012. جَب1 69013. جبّ1 69014. جَبَّ 1 69015. جبء2 69016. جَبَأٌ1 69017. جبأ11 69018. جَبَأَ2 69019. جَبَأَ 1 69020. جباً1 69021. جبا4 69022. جَبَا2 69023. جَبَا البِرَاقِ1 69024. جُبَّاء1 69025. جَبَّاء1 69026. جبائية1 69027. جُبَاب1 69028. جَبَابِريَّة1 69029. جُبَّاةُ1 69030. جَبَاخانُ1 69031. جباخان1 69032. جَبَّاد1 69033. جَبَّادة1 69034. جَبَّادي1 69035. جُبَارُ1 69036. جَبَّارُ1 69037. جبّار1 69038. جَبَّار1 69039. جُبَار1 69040. جُبَاران1 69041. جَبَّارة1 69042. جِبَارَة1 69043. جَبَّارِيّ1 69044. جُبَاري1 69045. جَبَّازيّ1 69046. جَبَّاش1 69047. جُبَّاع1 69048. جُبَّاعِيّ1 69049. جِبَالاَت1 69050. جِبَالَة1 69051. جبالي1 69052. جِبَالي1 69053. جِبَالِيَّة1 Prev. 100
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جاهلٌ في
الجذر: ج هـ ل

مثال: جَاهِلٌ في التاريخ
الرأي: مرفوضة
السبب: لاستعمال حرف الجر «في» بدلاً من حرف الجر «الباء».

الصواب والرتبة: -جاهلٌ بالتاريخ [فصيحة]-جاهلٌ في التاريخ [صحيحة]
التعليق: ذكرت المعاجم أن الفعل «جهل» يتعدى بالباء، وقد جاء في الوسيط: «جَهِل الشيءَ وبه: لم يعرفه»، ولكن أجاز اللغويون نيابة حروف الجر بعضها عن بعض، كما أجازوا تضمين فعل معنى فعل آخر فيتعدى تعديته، وفي المصباح (طرح): «الفعل إذا تضمَّن معنى فعل جاز أن يعمل عمله». وقد أقرَّ مجمع اللغة المصري هذا وذاك. وحلول «في» محل «الباء» كثير شائع في العديد من الاستعمالات الفصيحة، فهما يتعاقبان كثيرًا، وليس استعمال أحدهما بمانع من استعمال الآخر، كقول صاحب التاج: «ارتاب فيه
.... وارتاب به»، كما أن حرف الجر «في» أتى في الاستعمال الفصيح مرادفًا للباء، كقول ابن سينا: «وتواروا في الحشيش»، كما أنه يجوز نيابة «في» عن «الباء» على إرادة معنى الظرفية، أو بناء على تضمين الفعل المتعدي بـ «الباء» معنى فعل آخر يتعدى بـ «في».