57670. بقيقة1 57671. بقيليان1 57672. بُقَيْلِيَّان1 57673. بَقَّيْن1 57674. بك5 57675. بك وأخيك157676. بَكَّ 1 57677. بكء1 57678. بكأ11 57679. بَكَأَ1 57680. بَكَأَتِ1 57681. بكأت1 57682. بكؤ1 57683. بكا1 57684. بَكَا1 57685. بكاء مُرٌّ1 57686. بُكَابس1 57687. بُكَابِلِيّ1 57688. بكاتر1 57689. بَكَّار1 57690. بَكّارٌ1 57691. بَكَّارة1 57692. بَكَارة1 57693. بِكَارة1 57694. بَكَّاري1 57695. بكاس1 57696. بَكَّاس1 57697. بَكَاسُ1 57698. بكاسون1 57699. بكالوريا1 57700. بكالوريوس1 57701. بكالي1 57702. بِكَالِيّ1 57703. بَكَّالِيّ1 57704. بكان1 57705. بَكَّان1 57706. بكاه1 57707. بكَّاه1 57708. بكاهلي1 57709. بُكَاهِلِيّ1 57710. بكاوي1 57711. بُكَاوي1 57712. بكايري1 57713. بُكَايِريّ1 57714. بكبر1 57715. بَكْبَرَةُ1 57716. بكبك2 57717. بكْبَك1 57718. بكة1 57719. بَكَّةُ1 57720. بَكْت1 57721. بكت13 57722. بَكت1 57723. بَكَّتَ1 57724. بَكَتَ1 57725. بَكَتَ 1 57726. بكتاش1 57727. بِكْتاش1 57728. بُكَتَّاشِيّ1 57729. بكتريا1 57730. بكتريولوجيا1 57731. بكتكين1 57732. بَكَتَه1 57733. بكته1 57734. بكتور1 57735. بُكُتُوم1 57736. بُكَتُوم1 57737. بكتيريا1 57738. بُكَثِيرِيّ1 57739. بُكَجّ1 57740. بُكَدَّاس1 57741. بُكُدَاس1 57742. بِكْداي1 57743. بِكْدَش1 57744. بُكْدمَان1 57745. بُكُدَي1 57746. بُكَدْي1 57747. بَكْر1 57748. بِكْر1 57749. بكر18 57750. بَكَرَ1 57751. بَكْرٌ1 57752. بُكُرٌ1 57753. بَكْرُ الدِّين1 57754. بَكْرُ الصِّدِّيق1 57755. بَكَرَ 1 57756. بَكْرَابَاذُ1 57757. بَكْرات1 57758. بُكْران1 57759. بَكَرة1 57760. بُكْرَة2 57761. بَكْرَج1 57762. بكرد1 57763. بَكِرْدُ1 57764. بُكَرَم1 57765. بُكَرْم1 57766. بكره1 57767. بَكْرون1 57768. بَكِرون1 57769. بكرون1 Prev. 100
«
Previous

بك وأخيك

»
Next
بك وأخيك
الجذر: ب ك

مثال: مررت بك وأخيك
الرأي: مرفوضة
السبب: لأن أكثر النحويين لم يجيزوا العطف على الضمير المجرور بدون إعادة الجارّ.

الصواب والرتبة: -مررت بك وبأخيك [فصيحة]-مررت بك وأخيك [صحيحة]
التعليق: المشهور بين النحاة أن العطف على الضمير المجرور المتصل يقتضي إعادة الجار، كقوله تعالى: {فَقَالَ لَهَا وَلِلأَرْضِ} فصلت/11. وأجاز بعضهم العطف بدون إعادة الجار، وقد روي على ذلك بعض القراءات القرآنية والأحاديث النبوية وبعض الشعر العربي. وعليه تصح العبارة المرفوضة، وإن لم تبلغ في قوتها درجة الفصيح.